इतिहास जो खत्म करदिया गया।हिन्दुस्तान की आज़ादी में मुसलमानों की भूमिका पर एक नज़र
हिन्दुस्तान की आज़ादी में मुसलमानों की भूमिका पर एक नज़र मादरे वतन ज़िन्दाबाद - हिंदुस्तान ज़िन्दाबाद’। आज के हालात पर शायरों के दो शेर: " अपने दिल की किसी हसरत का पता देते हैं, मेरे बारे में जो लोग अफवाह उड़ा देते हैं।" (कृष्ण बिहारी नूर) "जब पड़ा वक़्त गूलिस्तां पे तो ख़ूं हमने दिया, जब बहार आई तो कहते हैं, तेरा काम नहीं।" यह पोस्ट लिखने का मक़सद छद्म राष्ट्रवादियों और जश्ने आज़ादी पर मदरसों की वीडियोग्राफी का फरमान जारी करने वालों को आईना दिखाना और साफ तौर पर बताना है कि देशहित में वे मुसलमानों के स्वयंभू पहरेदार बनकर दिशानिर्देश जारी करना और उनके मज़हबी व समाजी मामलों में दख़लअंदाजी से बाज़ आयें। फ़रमान जारी हुआ है मदरसों में झंडा फहराओ। इन्हें शायद पता नहीं कि देश को झंडा फहराना ही मदरसों ने सिखाया है। तुम्हारी वीडियोग्राफी के डर से मदरसों में तिरंगा झंडा नहीं फहराया जाएगा। आज़ादी के बाद से आज तक मदरसों में तिरंगा झण्डा फहराया जाता रहा है और आगे भी ऐसा होता रहेगा। मुसलमान कल भी जश्ने आज़ादी पूरे जोश से मनाते थे, आगे भी मनाते रहेंगे, क्योंकि मशहूर शायर राहत इन्दौरी...