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Showing posts from October 21, 2021

कैंसर की इलाज को इतना ज्यादा सस्ता करने जा रही थी यह महिला वैज्ञानिक के एक सरदर्द की गोली के अंदर इसका इलाज होता।मगर एक साज़िश के तहत उसे मारदिया गया डॉ. समीरा मौसा ।

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कैंसर की इलाज को इतना ज्यादा सस्ता करने जा रही थी यह महीला वैज्ञानिक के एक सरदर्द की गोली के अंदर इसका इलाज होता।  डॉ. समीरा मौसा  समीरा मौसा (3 मार्च, 1917 - 5 अगस्त, 1952) मिस्र की पहली परमाणु भौतिक विज्ञानी थीं।  समीरा ने परमाणु विकिरण में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की।  उन्हें उम्मीद थी कि उनके काम से एक दिन सस्ती चिकित्सा उपचार और परमाणु ऊर्जा का शांतिपूर्ण उपयोग होगा।  उन्होंने शांति सम्मेलन के लिए परमाणु ऊर्जा का आयोजन किया और एक कॉल को प्रायोजित किया जिसने "शांति के लिए परमाणु" बैनर के तहत एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन स्थापित किया।  वह काहिरा विश्वविद्यालय में काम करने वाली पहली महिला थीं। मुस्लिम ख़्वातीन वैज्ञानिकों का ज़िक्र हो और समेरा मौसा का ज़िक्र न हो तो ये एक बहुत बड़ी नाइंसाफी होगी. 1917 के अंदर पैदा होने वाली मिस्री न्युक्लियर वैज्ञानिक जिन्हें मिस्र में न्युक्लियर की मां भी कहा जाता है. उन की वैसे तो बहुत से अविष्कार है. मगर उनकी सबसे खास अविष्कार बहुत कम लागत में बनने वाला एट्मबम फार्मूला था. इस के अलावा वो मेडिकल फील्ड के अंदर न्युक्लियर स...

डाक्टर हसन कामेल अल-सबाह ना होते तो शायद दुनिया आज सोलर सेल से अनजान रहती इस अजीम शख्स को जैसे अरब का एडीसन भी कहा जाता है.।

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डाक्टर हसन कामिल अल-सबाह । अगस्त, 1894 -  मार्च, 1935) एक लेबनानी इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स अनुसंधान इंजीनियर, गणितज्ञ और आविष्कारक थे।  लेबनान से ताल्लुक रखने वाला अज़ीम मुस्लिम वैज्ञानिक डाक्टर हसन कामिल अल-सबाह ने 1930 के अंदर सोलर सेल की इब्तिदाई इन्वेंशन की जिस का जदीद शक्ल हम दुनिया भर के अंदर सोलर पैनल की शक्ल में देख सकते हैं. याने के वो इलेक्ट्रिक सेल ईजाद न करते तो आज हमें जो मशीन (space) के अंदर दिखाई देते हैं वो भला कैसे काम करते क्योंकि ये मशीन अपने उपर लगे सोलर पैनल से सुरज के जरिए इलेक्ट्रिसिटी हासिल करती है. इन्होंने ही लिक्वाईड क्रिस्टल का नज़रिया पेश किया जो के आज हमारे हर एक टिव्ही सेट, लैपटॉप या मोबाईल वगैराह की स्क्रीन है. उन का बनाया गया वेल्डिंग का तरीका आज भी हैवी इंडस्ट्रीज के अंदर इस्तेमाल होता है. लेकिन इस अजीम शख्स को जैसे अरब का एडीसन भी कहा जाता है. इन्हें अमेरिका के अंदर एक रोड आक्सीडेंट में  प्लानिंग के साथ मारा गया. किसी शख्स ने जान बुझकर इसकी गाड़ी को टक्कर मार कर खाई में गिरा दिया और वो शख्स आज तक नहीं पकड़ा गया.

यह्या अल-मशद नामी अटॉमिक वैज्ञानिक ।जिनको मौसाद ने जान बुझकर निशाना बनाकर कत्ल कर दिया

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यह्या अल-मशद नामी अटॉमिक वैज्ञानिक को फ्रांस के अंदर क़त्ल कर दिया गया. इसी तरह ईरान के बहुत से वैज्ञानिक जिन का तालुक खासतौर पर डिफेंस टेक्नोलॉजी से था. इन्हें मौसाद ने जान बुझकर निशाना बनाकर कत्ल कर दिया और आज मुस्लिम कौम के बारे में ये धारणा है के ये कोई जाहील और फसाद फैलाने वाली कौम है. जिस ने वैज्ञान के मैदान में कुछ भी नहीं किया यानी के जदीद दौर के कोई भी अविष्कार मुस्लमानो ने नहीं किए. जिन का रोना आज हमारे मुल्क के दानिश्वरो के ज़बानी आप को सुनने को मिलता रहता होगा. मगर ऐसा नहीं है बस हमें बताया नहीं जाता. आप ने इन अज़ीम वैज्ञानिकों के कारनामों और इनके पुर असरार मौत का जिक्र मिडिया या किसी दानिश्वर की ज़ुबानी सुना..... और शायद हम जानना भी नहीं चाहते बस जो कुछ किसी ने बताया तो हम ने मान लिया. खुद कभी हम ने रिसर्च कि ही नहीं. याद रहे जब भी किसी कौम पर ज़वाल आता है. तो सबसे पहले उनके अंदर जाहिलो की तादाद में इज़ाफ़ा हो जाता है. वो इल्म की मुखालिफ होकर कारोबारी बन जाते हैं. इनके इल्म की मक़्सद ज़ाती मफाद का तहफज़ होता है ना के अख्लाकी और समाज़ी जिंदगी के अंदर सुधार लाना. अगर किसी को...