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इब्न रुशद - जिन के द्वारा टैक्नोलॉजी पर लिखी गई किताबें यूरोप के कालिजों मैं आज भी बड़े फख्र के साथ पढ़ाई जाती हैं।

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इब्न रुशद  पूरा नाम अरबी में:                          أبو الوليد محمد ابن احمد ابن رشد‎,  अबू-उल-वलीद इब्न अहमद इब्न रुस्द;                          ( 14 अप्रैल 1126 - 11 दिसंबर 1198), उनके द्वारा किए गए कार्यों में..>>> मैथ और  धर्मशास्त्रीय प्रमाणित विज्ञान, धर्मशास्त्र, चिकित्सक, वैज्ञानिक, भौतिक विज्ञान, वैज्ञानिक, विज्ञान, वैज्ञानिक प्रमाण पत्र, और भाषा विज्ञान मिश्रित के बारे में लिखा गया है।   100 से अधिक समूह और समूह के लेखक।  उनके द्वारा किए गए कार्यों में अरस्तू पर कई टिप्पणियाँ शामिल हैं, जिसके लिए उन्हें पश्चिमी दुनिया में टिप्पणीकार और तर्कवाद के पिता के रूप में जाना जाता था।  इब्न रुश्द ने एक मुख्य न्यायाधीश और डॉक्टर के रूप में कार्य किया । उनका जन्म 1126 में कॉर्डोबा में प्रमुख न्यायाधीशों के परिवार में हुआ था - उनके दादा शहर के मुख्य न्यायाधीश थे। 1169 में उन्हें खलीफा अबू याकूब यूसुफ से मिलवाया ग...

अशफाकउल्ला खान (22 अक्टूबर 1900 - 19 दिसंबर 1927) भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में एक भारतीय स्वतंत्रता कार्यकर्ता और हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के सह-संस्थापक थे।

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अशफाकउल्ला खान (22 अक्टूबर 1900 - 19 दिसंबर 1927) भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में एक भारतीय स्वतंत्रता कार्यकर्ता और हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के सह-संस्थापक थे। खान का जन्म शाहजहांपुर, भारत में शफीकुल्लाह खान और मजहरुनिसा के घर हुआ था। उनका जन्म खैबर जनजाति के एक मुस्लिम पठान परिवार में हुआ था। वह अपने पांच भाई-बहनों में सबसे छोटे थे।  1920 में, महात्मा गांधी ने भारत में ब्रिटिश शासन के खिलाफ अपना असहयोग आंदोलन शुरू किया। लेकिन 1922 में चौरी चौरा की घटना के बाद, महात्मा गांधी ने इस आंदोलन के आह्वान को वापस लेने का फैसला किया।  काकोरी डकैती का मामला।  उस समय, खान सहित कई युवा उदास महसूस कर रहे थे। तभी खान ने समान विचारधारा वाले स्वतंत्रता सेनानियों के साथ एक संगठन बनाने का फैसला किया, जिसके परिणामस्वरूप 1924 में हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन का गठन हुआ। इस एसोसिएशन का उद्देश्य एक स्वतंत्र भारत प्राप्त करने के लिए सशस्त्र क्रांतियों का आयोजन करना था। अपने आंदोलन को बढ़ावा देने और अपनी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए हथियार और गोला-बारूद खरीदने के लिए, हिंदुस्त...

कैंसर की इलाज को इतना ज्यादा सस्ता करने जा रही थी यह महिला वैज्ञानिक के एक सरदर्द की गोली के अंदर इसका इलाज होता।मगर एक साज़िश के तहत उसे मारदिया गया डॉ. समीरा मौसा ।

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कैंसर की इलाज को इतना ज्यादा सस्ता करने जा रही थी यह महीला वैज्ञानिक के एक सरदर्द की गोली के अंदर इसका इलाज होता।  डॉ. समीरा मौसा  समीरा मौसा (3 मार्च, 1917 - 5 अगस्त, 1952) मिस्र की पहली परमाणु भौतिक विज्ञानी थीं।  समीरा ने परमाणु विकिरण में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की।  उन्हें उम्मीद थी कि उनके काम से एक दिन सस्ती चिकित्सा उपचार और परमाणु ऊर्जा का शांतिपूर्ण उपयोग होगा।  उन्होंने शांति सम्मेलन के लिए परमाणु ऊर्जा का आयोजन किया और एक कॉल को प्रायोजित किया जिसने "शांति के लिए परमाणु" बैनर के तहत एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन स्थापित किया।  वह काहिरा विश्वविद्यालय में काम करने वाली पहली महिला थीं। मुस्लिम ख़्वातीन वैज्ञानिकों का ज़िक्र हो और समेरा मौसा का ज़िक्र न हो तो ये एक बहुत बड़ी नाइंसाफी होगी. 1917 के अंदर पैदा होने वाली मिस्री न्युक्लियर वैज्ञानिक जिन्हें मिस्र में न्युक्लियर की मां भी कहा जाता है. उन की वैसे तो बहुत से अविष्कार है. मगर उनकी सबसे खास अविष्कार बहुत कम लागत में बनने वाला एट्मबम फार्मूला था. इस के अलावा वो मेडिकल फील्ड के अंदर न्युक्लियर स...

डाक्टर हसन कामेल अल-सबाह ना होते तो शायद दुनिया आज सोलर सेल से अनजान रहती इस अजीम शख्स को जैसे अरब का एडीसन भी कहा जाता है.।

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डाक्टर हसन कामिल अल-सबाह । अगस्त, 1894 -  मार्च, 1935) एक लेबनानी इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स अनुसंधान इंजीनियर, गणितज्ञ और आविष्कारक थे।  लेबनान से ताल्लुक रखने वाला अज़ीम मुस्लिम वैज्ञानिक डाक्टर हसन कामिल अल-सबाह ने 1930 के अंदर सोलर सेल की इब्तिदाई इन्वेंशन की जिस का जदीद शक्ल हम दुनिया भर के अंदर सोलर पैनल की शक्ल में देख सकते हैं. याने के वो इलेक्ट्रिक सेल ईजाद न करते तो आज हमें जो मशीन (space) के अंदर दिखाई देते हैं वो भला कैसे काम करते क्योंकि ये मशीन अपने उपर लगे सोलर पैनल से सुरज के जरिए इलेक्ट्रिसिटी हासिल करती है. इन्होंने ही लिक्वाईड क्रिस्टल का नज़रिया पेश किया जो के आज हमारे हर एक टिव्ही सेट, लैपटॉप या मोबाईल वगैराह की स्क्रीन है. उन का बनाया गया वेल्डिंग का तरीका आज भी हैवी इंडस्ट्रीज के अंदर इस्तेमाल होता है. लेकिन इस अजीम शख्स को जैसे अरब का एडीसन भी कहा जाता है. इन्हें अमेरिका के अंदर एक रोड आक्सीडेंट में  प्लानिंग के साथ मारा गया. किसी शख्स ने जान बुझकर इसकी गाड़ी को टक्कर मार कर खाई में गिरा दिया और वो शख्स आज तक नहीं पकड़ा गया.

यह्या अल-मशद नामी अटॉमिक वैज्ञानिक ।जिनको मौसाद ने जान बुझकर निशाना बनाकर कत्ल कर दिया

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यह्या अल-मशद नामी अटॉमिक वैज्ञानिक को फ्रांस के अंदर क़त्ल कर दिया गया. इसी तरह ईरान के बहुत से वैज्ञानिक जिन का तालुक खासतौर पर डिफेंस टेक्नोलॉजी से था. इन्हें मौसाद ने जान बुझकर निशाना बनाकर कत्ल कर दिया और आज मुस्लिम कौम के बारे में ये धारणा है के ये कोई जाहील और फसाद फैलाने वाली कौम है. जिस ने वैज्ञान के मैदान में कुछ भी नहीं किया यानी के जदीद दौर के कोई भी अविष्कार मुस्लमानो ने नहीं किए. जिन का रोना आज हमारे मुल्क के दानिश्वरो के ज़बानी आप को सुनने को मिलता रहता होगा. मगर ऐसा नहीं है बस हमें बताया नहीं जाता. आप ने इन अज़ीम वैज्ञानिकों के कारनामों और इनके पुर असरार मौत का जिक्र मिडिया या किसी दानिश्वर की ज़ुबानी सुना..... और शायद हम जानना भी नहीं चाहते बस जो कुछ किसी ने बताया तो हम ने मान लिया. खुद कभी हम ने रिसर्च कि ही नहीं. याद रहे जब भी किसी कौम पर ज़वाल आता है. तो सबसे पहले उनके अंदर जाहिलो की तादाद में इज़ाफ़ा हो जाता है. वो इल्म की मुखालिफ होकर कारोबारी बन जाते हैं. इनके इल्म की मक़्सद ज़ाती मफाद का तहफज़ होता है ना के अख्लाकी और समाज़ी जिंदगी के अंदर सुधार लाना. अगर किसी को...

मौलाना महमूद मदनी लगातार 13 वीं बार सबसे प्रभावशाली मुस्लिम शख्सियत में शामिल किए गए हैं मौलाना महमूद मदनी शीर्ष 50 प्रभावशाली लोगों की सूची में पहले भारतीय हैं।

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मौलाना महमूद मदनी शीर्ष 50 प्रभावशाली लोगों की सूची में पहले भारतीय हैं। जॉर्डन: शोध संगठन RISSC ने 2022 के लिए नई सूची जारी की है, जिसमें जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी शामिल हैं। मौलाना मदनी लगातार तेरहवीं बार दुनिया के 50 सबसे प्रभावशाली मुस्लिम शख्सियत में शामिल किए गए हैं। इस सूची में भारत के सबसे प्रभावशाली विद्वान और धार्मिक और सामाजिक नेता भी शामिल हैं। इस सूची में मौलाना महमूद मदनी शीर्ष 50 प्रभावशाली लोगों की सूची में पहले भारतीय हैं। 500 लोगों की सूची में दुनिया भर के विभिन्न क्षेत्रों (राजनीति, समाजशास्त्र, शिक्षा, विज्ञान, आदि) से कई शख्सियत शामिल हैं, लेकिन मौलाना महमूद मदनी शीर्ष 50 में एकमात्र भारतीय हैं। इस सूची में बरेलवी मौलवी मुफ्ती अख्तर रजा खान कादरी अज़हरी को भी शामिल किया गया था, लेकिन उनका निधन हो चुका है। RISSC ने मौलाना महमूद मदनी की राष्ट्र और सामाजिक सेवाओं के बारे में भी उल्लेख है। संस्था ने लिखा है कि मौलाना महमूद मदनी ने भारत में मुसलमानों के अधिकारों की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। साथ ही वे आतंकवाद के खिलाफ भी मुखर रह...

आखिर पता ही चलगया कि रोज क्यों कट जाती है 2-3 घंटे के लिए पूरे गांव की बिजली।

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आपको बता दें कि अक्सर देखा जाता रहा है कि महिलाओं को लेकर आये दिने कोई न कोई घटना सोशल मीडिया के माध्यम से हमें सुनने को मिलती ही रहती है। आज भी एक ऐसी घटना सुनने में आ रही है, जिसे सुनने के पश्चात आप लोग भी सोच में पड़ जायेगें। क्योंकि यह घटना ही कुछ अजीब है। दरअसल ये घटना पुर्णिया जिले के नगर थाना क्षेत्र के गनेशपुर डहरिया आदिवासी टोला की है। जहां के लोग लगातार बिजली के आँख मिचौली से परेशान थे। भीषण गर्मी में लोग इसको लेकर सरकार को कोस रहे थे। हर 2 3 दिन में गाँव की बिजली 2 से 3 घंटे के लिए गायब हो जाया करती थी, जबकि इसके आसपास के गाँव मे बिजली रहती थी। वहीं बिजली कटने की वजह जब लोगो को पता चला तो सभी है-रान रह गए। आपको बता दें कि परोरा गाँव का रहने वाला बिजली मिस्त्री सुरेंद्र राय का प्रेम प्रसंग आदिवासी जमाई टोला के आदिवासी युवती से था। बिजली मिस्त्री को जब भी युवती से प्यार करने का मन होता था वह गाँव का बिजली काटकर अंधेरे का फायदा उठाकर दोनो रंगरलिया मनाते थे। इस बात की भनक युवती के पड़ोसी को लग गई। फिर जैसे ही गाँव की बिजली कटी लोगो को पता चल गया कि फिर दोनों मिलने वाले है। जिसके...